
“और विश्वास के बिना उसे प्रसन्न करना अनहोना है; क्योंकि परमेश्वर के पास आनेवाले को विश्वास करना चाहिए कि वह है, और अपने खोजनेवालों को प्रतिफल देता है।”
कई लोग निष्क्रिय हो जाने की गलती करते हैं, यह मानकर कि बिना उनके सहयोग के ही अपने आप कुछ अच्छा हो जाएगा। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। हम परमेश्वर के साथ भागीदार हैं, और इसलिए हमें उनके साथ सहयोग करना चाहिए।
ऐसी कई बातें हैं जिनके बारे में हमें सोचना चाहिए, जिन्हें बोलकर प्रकट करना चाहिए, और जिन्हें जानबूझकर करना चाहिए। इसी को अपने विश्वास को कार्यों में बदलना कहते हैं।
हमारा जीवन परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप हो सकता है, लेकिन ऐसा अपने आप नहीं होगा। इसके लिए हमें जानबूझकर और लगातार प्रयास करना होगा। परमेश्वर के मार्गों पर चलने के अपने संकल्प में लगनशील रहें, और आप अपने जीवन में अच्छे फल देखेंगे।
हे पिता, मुझे आपके साथ एक सक्रिय भागीदार बनने में मदद करें, न कि निष्क्रिय। मुझे अपने विश्वास को कार्यों में बदलने और हर दिन जानबूझकर आपके मार्गों पर चलने के लिए लगन दें। आमेन